शनिवार, 19 सितंबर 2009

क्या लिखूँ ..............



क्या लिखूँ......

अब कुछ भी तो नहीं बचा ...
सोचता हूँ कुछ सपने ही लिख दूं
ऐसे सपने जो शायद सच हो जायें
ऐसे ख्वाब जो शायद अधूरे न रहे .................

बड़े अजीब होते हैं ये सपने
जब तक जहाँ तक जो चाहो देख लो
सब हकीकत से नज़र आते हैं
पर ये सपने भी झूठे नहीं होते
ये एक चेतावनी हैं
ये भविष्य की हकीकत हैं ...जो सपनो में बयां हो जाती है .

सपना .........
एक संसार सत्य है ...
इन्सान जब तक जिन्दा है वो एक हकीकत है
और जब वो मर जाता है तो एक सपना बन जाता है
सपनो की दुनिया भी बड़ी अजीब दुनिया है
कहने को कुछ भी सच नहीं ..फिर भी सब सच सा है

आज मै भी एक सपना देख रहा हूँ ........
इन्सान के विकास का सपना ....शांति और अमन का सपना
एक ऐसा सपना जो सच हो जाये तो ये संसार स्वर्ग हो जाये

काश !!!!ये सपना भी भविष्य की हकीकत हो जाता .


~~rishu~~

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