गुरुवार, 24 सितंबर 2009

रफ्ता-रफ्ता........



रफ्ता रफ्ता ये सफ़र यूँ ही गुज़र जायेगा......
जो गया ये वक़्त तो फिर लौट कर ना आएगा,
ये मसल्सल रात भी कट जायेगी हमदम मेरे ,
पर सुबह जो आएगी वो भी कभी कट जायेगी,
आज का ये वक़्त है जी लो इसे जी भर के तुम,
याद करने को कभी ये मस्तियाँ रह जाएँगी ,
क्या पता कल हम तुम्हारे हमसफ़र हों या न हों,
क्या पता की कल तुम्हारे दोस्तों में हम न हों,
फिर भी कल सोचोगे जब भी आज की तारीख को....
दिल का एक कोना मेरे एहसास से भर जायेगा..........!!!

~~rishu~~

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