शनिवार, 19 सितंबर 2009

Destination..............


मै हूँ आगे रस्ते हैं ...
और दूर कहीं पर मंजिल है
निकल पड़ा हूँ इन रस्तों पर, उस मंजिल की चाहत लेकर
जो रेगिस्तानी पानी सी
भ्रम पूरित......धूमिल-धूमिल सी
मृग-मारीच सी लगती है
पर द्रग (eyes) जाने क्यों इस भ्रम में कैसा आनंद पाते हैं
और कदम बिन ठिठके ही, क्यों आगे बढ़ते जाते हैं
अब भी है उम्मीद ये मन में.......
या कहिये विश्वास यही है
रों का तो पता नहीं.......
...पर ...

....मेरी मंजिल यहीं कहीं है ...

~~rishu~~

3 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut shukriya Kshma ji...you are the first follower of this blog.

    [means i have an analyst for my creation]

    Regards
    ~~rishu~~

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  2. chaht he to manzil b mil jayegi... rachna bahut satik or sundar huyi he.. badhayi

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