रविवार, 20 सितंबर 2009

Manthan..........Kuchh sawal kuchh jawab.



जब शब्द नहीं था दुनिया में....
तब क्या कविता भी न थी ???
जब सूर्य नहीं था दुनिया में ....
तब क्या सविता भी न थी ???
जब जीव नहीं था दुनिया में....
तब क्या जीवन भी न था ???

"फिर प्रारंभ कैसा था??"


जब शब्द नहीं था तब भी कविता थी पर............मौन थी !
जब सूर्य नहीं था तब भी सविता थी पर.....तम् में लीन थी !
जब जीव नहीं था तब भी जीवन था पर.......वो भी मृत था !

"दुनिया की शुरुआत शायद कुछ ऐसी थी !!"


~~rishu~~


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