रविवार, 18 अक्तूबर 2009

!!!! शुभ दीपावली !!!!......एक ग़ज़ल ........

मेरी आदत है मै ख्वाबो खयाली पर नहीं लिखता ,
सवालातों पे लिखता हूँ सवाली पर नहीं लिखता !!

मेरी फितरत नहीं लिखूं किसी की ताजपोशी पर ,
किसी की शान में गायी कव्वाली पर नहीं लिखता !!

यहाँ कुछ दोस्त मेरे हैं मेरी तबियत से नावाकिफ ,
वो जो चाहें कहें मैं उनकी गाली पर नहीं लिखता!!
 
मै कायल उन दरख्तों का जो जलकर आग देते हैं ,
करीने से पली फूलों की डाली पर नहीं लिखता !!
 
हूँ लिखता उसके सजदे में जो ता-उम्र साथ रहती है,
मै इस महफिल में हर एक आने वाली पर नहीं लिखता !!
 
शहर बेशक घिरा रहता है मजहब के बवालों में,
मगर जाने क्यूँ मै फिर भी बवाली पर नहीं लिखता !!

कभी डरता नहीं हूँ इश्क के इजहार से लेकिन,
जो इन ख्वाबों में है उस सुरमे वाली पर नहीं लिखता !!

मै लिखता हूँ तिमिर में रौशनी देते चरागों पर,
अमीरों के यहाँ मनती दिवाली पर नहीं लिखता !!


तखल्लुस कुछ नहीं लिखता न कोशिश आजमाता हूँ ,
मेरे मोहसिन मैं अब लोगों की ताली पर नहीं लिखता !!



~~rishu~~

ऑरकुट......

ऑरकुट...
कुछ रचने की
कुछ रटने की.....
अद्भुत युक्ति....मिलने जुलने की
कभी मित्र है....कभी छात्र है...
संवेदन बस नाम मात्र है
सच है
पूरी जिंदगी है...या
इसके बिन अधूरी जिंदगी है !!

~~rishu~~

मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

दर्द..........



जब दर्द नहीं था तो ये दर्द था की कोई दर्द नहीं है
और
अब जब दर्द है तो ये दर्द है की बड़ा कम्ज़र्द ये दर्द है
और मुझ बेदर्द को जिसने ये मीठा दर्द दिया है
उसे इस दर्द का अहसास है...
पर..दर्द नहीं है!!

~~rishu~~

गुरुवार, 8 अक्तूबर 2009

ब्रह्मज्ञान................



आज का इंसान जा रहा ब्रह्मज्ञान से दूर
मैं कहता हूँ है सही दुनिया का यह दस्तूर
  क्यूंकि गर संसार ब्रह्मज्ञानी हो जाता
फिर बतलाओ सारा रूपया कौन कमाता
कैसे होती चोरी,
कैसे होता घोटाला
कैसे चलता खेल मेज के नीचे वाला
बिगड़ा बेटा खून बाप का कैसे पीता
और कैसे
संसार बिना तनख्वाह के जीता
फिर तो लोग बड़े ही ईश्वरमय हो जाते
हर वस्तु में स्वयं
स्वयं में ईश्वर पाते
फिर न होती चोरी न होता घोटाला
हर वस्तु का हर प्राणी होता रखवाला 

~~rishu~~

चार लाइनें.........


हर कदम एक लम्बा सफ़र बन गया है
ये जीवन भी एक खेलघर बन गया है
सृष्टिकर्ता भी अब जिससे डरने लगा है
कल का इंसान वो जानवर बन गया है!

~~rishu~~

बुधवार, 7 अक्तूबर 2009

मुश्किल है ................


दिल के कुछ जज्बातों को ............

कुछ टूटी फूटी यादों को ....
कागज़ पर लिखने की कोशिश ..............
अफ़सोस........
ये करना मुश्किल है .

क्यूंकि वो ज़ख्म जो सालों से.... इस दिल में पकते आये हैं
अब भी उनमे पस बहता है ,
कुछ दर्द अभी भी बाकि है ,
एक टिस अभी भी उठती है ,
महसूस तो करता हूँ इनको...... पर ज़ाहिर करना मुश्किल है! .

उस रोज़ किसी के मातम में,
खुद जिन्दा हूँ .....ये ज्ञात हुआ
जब और किसी की टिक्ठी को अपने कंधो के साथ छुआ .....
ऐ काश!!.... की ये सपना होता ....
मैं जिंदा हूँ.....ये ठीक नहीं
अब तो इस जिन्दा लाश को बरसों लाद के चलना मुश्किल है .

कुछ काम अभी भी बाकि हैं ...
लोगो मेरे इस दुनिया में ...
शायद कुछ जिम्मेदारी सी ....
या शायद कोई उधारी सी ..........
कल तक तो पूरी कर न सका ...अब पूरी करना मुश्किल है .

~~rishu~~

गुरुवार, 1 अक्तूबर 2009

Bas yu hi...........

चाक जिगर के सी लेते हैं ,जैसे भी हो जी लेते हैं..
हम दीवाने इस दुनिया की सब तकलीफें पी लेते हैं
कहते हो हम डर जायेंगे..साथ छोड़ कर बढ़ जायेंगे
क्या जानो तुम तेरी खातिर इस दुनिया से लड़ जायेंगे
ये भी अज़ब तमाशा यारों..उनको अब दिखलाना होगा
उनकी खातिर मर सकते हैं..उनकी खातिर जी लेते हैं
पर वो शायद तैयार नहीं..या उनको हमसे प्यार नहीं है
वरना मेरे साथ वो होते..मेरे हाथ में उनके हाथ तो होते
भले न होती साथ ये दुनीया..हम दोनों के जज़्बात तो होते
उनकी इन सुरमई आँखों के ख्वाबों को पढना आता है
दर्द बयां करना आता है.. मुश्किल से लड़ना आता है
तेरी खातिर फिर भी अक्सर घूँट खून के पी लेते हैं..

~~rishu~~