बुधवार, 7 अक्तूबर 2009

मुश्किल है ................


दिल के कुछ जज्बातों को ............

कुछ टूटी फूटी यादों को ....
कागज़ पर लिखने की कोशिश ..............
अफ़सोस........
ये करना मुश्किल है .

क्यूंकि वो ज़ख्म जो सालों से.... इस दिल में पकते आये हैं
अब भी उनमे पस बहता है ,
कुछ दर्द अभी भी बाकि है ,
एक टिस अभी भी उठती है ,
महसूस तो करता हूँ इनको...... पर ज़ाहिर करना मुश्किल है! .

उस रोज़ किसी के मातम में,
खुद जिन्दा हूँ .....ये ज्ञात हुआ
जब और किसी की टिक्ठी को अपने कंधो के साथ छुआ .....
ऐ काश!!.... की ये सपना होता ....
मैं जिंदा हूँ.....ये ठीक नहीं
अब तो इस जिन्दा लाश को बरसों लाद के चलना मुश्किल है .

कुछ काम अभी भी बाकि हैं ...
लोगो मेरे इस दुनिया में ...
शायद कुछ जिम्मेदारी सी ....
या शायद कोई उधारी सी ..........
कल तक तो पूरी कर न सका ...अब पूरी करना मुश्किल है .

~~rishu~~

5 टिप्‍पणियां:

  1. kuchh kaam abhi bhi baaki hai ....


    bahut sundar bhavon se saji hai aapki ye rachna...badhai

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  2. bahut badhiya Rishu bhai ...

    jab bhi likhte ho ..
    dil se likhte ho ..
    yahi wajah hai ki husn barkarar rehta hai aapki har rachna ka..
    likhte rahen bhai ..

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  3. itna sundar or gera kaise likh lete ho ap????
    mashallah waise likhte bahut gazab ho... keep sharing...

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  4. रिशु जी,
    बेहद भावपूर्ण और अर्थपूर्ण रचना है, जीवन के सत्यता के सभी रंगों की गहन अभिव्यक्ति, बधाई और शुभकामनाएं!

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