मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

दर्द..........



जब दर्द नहीं था तो ये दर्द था की कोई दर्द नहीं है
और
अब जब दर्द है तो ये दर्द है की बड़ा कम्ज़र्द ये दर्द है
और मुझ बेदर्द को जिसने ये मीठा दर्द दिया है
उसे इस दर्द का अहसास है...
पर..दर्द नहीं है!!

~~rishu~~

2 टिप्‍पणियां:

  1. rishu ji dard me rah kar dard ke ahsas ko anubhav karnaaur vyakt karna bahut khub ..........
    maine bhi dard ko mahsus kar uske anubhav ko likha hai.........
    bahut achhi lagi aapki ye dard poem.......

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