रविवार, 18 अक्तूबर 2009

ऑरकुट......

ऑरकुट...
कुछ रचने की
कुछ रटने की.....
अद्भुत युक्ति....मिलने जुलने की
कभी मित्र है....कभी छात्र है...
संवेदन बस नाम मात्र है
सच है
पूरी जिंदगी है...या
इसके बिन अधूरी जिंदगी है !!

~~rishu~~

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें