रविवार, 29 नवंबर 2009

Still confused...&..lonely


 
इतनी सारी भीड़ है फिर भी खुद को तनहा पाता हूँ,
इन जाने पहचाने चेहरों को अनजाना सा पाता हूँ,
भटके लोगो को उनकी मंजिल की राह दिखता हूँ,
पर
खुद की सुध जब लेता हूँ तो खुद को भटका पाता हूँ !

~~~rishu~~~

शनिवार, 28 नवंबर 2009

उनके लिए............

की कोशिश तुझे भुलाने की
और कसम थी पास न आने की

कुछ सपने दिल में दबे हुए
और ख्वाहिश तुझे मानाने की

जज्बात पड़े थे परदे में
जिन पर थी नज़र ज़माने की

जब कल तू मेरे साथ न थी
अब आज मुझे तेरी आस नहीं

कल सबने पूछा कौन हो तुम
मै कह बैठा कुछ याद नहीं....

~~rishu~~

Ek Sher..

जिनकी खातिर हम खुदाया पाक से भी लड़ गए ,
आज वो हमको ही काफिर कह कर आगे बढ़ गए !! .
 
~~rishu~~

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

ज़िन्दगी...जी................

मिली थी रास्ते पर वो अकेली जिंदगी,
नाम पूछा तो बताया जिंदगी,
उसको देखा तो अँधेरा रौशनी से भर गया,
बूँद का कतरा भी यूं समझो समुन्दर बन गया,
जिंदगी ने जिंदगी को हर तरह से रंग दीया,
और कुछ लम्हों में फिर मुझको अकेला कर दीया,
उस जिंदगी की याद में मैं इससे ज्यादा क्या लिखूँ,
जिंदगी ने छीन डाला जिंदगी भर का सुकूँ .............!!!!!!!!!!


~~rishu~~

रविवार, 15 नवंबर 2009

Dosti.................

हमने तो अपने रास्ते तब-तब बदल दिए ....
जब-जब निगाह -ऐ -यार में कुछ दुश्मनी दिखी ,
अब तक गुजर चुके हैं हर एक रहगुज़र से हम
पर क्या करे अब दोस्ती दिखती नहीं कहीं !!


~~rishu~~

मंगलवार, 3 नवंबर 2009

महाभारत.............


कर रहा विलाप पाप,
बढ़ रहे हैं धर्मराज ,
विदुर खड़ा सूना रहा है,
कौरवों का सर्वनाश !!
..
.
सूर्य छुप गया कहीं ,
और धरा भी हिल रही ,
ये कैसा वक़्त आ गया की ,
दिन है न निशा रही !!
..
.
ये युद्ध एक प्रमाण है ,
मनुष्यता की जीत का ,
इसी में दिख रहा है फर्क ,
द्वेष और प्रीत का !!
..
.
अभी ख़तम नहीं हुआ,
ये युद्ध अब भी जारी है,
अभी भी पांडु-पुत्र हैं,
अभी भी वंशी धारी हैं !!

अभी भी वीर कर्ण के ,
ज्ञान चक्षु बंद हैं .
अभी भी द्रोणाचार्य के ,
अंतर ह्रदय में द्वंद है
..
.
है जरुरत आज फिर ,
कृष्ण के उपदेश की ,
आज फिर अर्जुन का साहस
अंतर्व्यथा में मंद है


परन्तु मित्र देखना ये युद्ध हारना नहीं ,
असत्य के समक्ष अपने अस्त्र डालना नहीं ;
तुम्हे शपथ है सत्य की,
स्वयं तुम्हारे रक्त की;
तुम्ही में आज भीम है तुम्ही में आज पार्थ है ;
तुम्हारे हाथ में ही आज द्रोपदी की लाज;
...

तुम आज भी समर्थ हो पुनः विजय तुम्हारी है !!


~~rishu~~

सोमवार, 2 नवंबर 2009

Sochta hoo.......................

मेरी  माँ  ने मेरे हिस्से में क्या रक्खा था  
उसने ये राज़ भी  सीने में दबा रक्खा था  !!

कोई उम्मीद नहीं थी पर अब भी जिंदा हैं  
हमें तो माँ की दुआओं ने बचा रक्खा था  !!
 
अब जो मिलती है तो राह बदल लेती है  
हमने जिसके लिए इस दिल को सज़ा रक्खा था !!

कभी मिलना तो ज़रा दूरिया रखना उनसे 
ये वो कातिल हैं जिन्हें दुश्मन ने बना रक्खा था !!

साकी अब छोड़ दे ये जाम पिलाना मुझको
इसने कई रोज मेरे पुरखो को खफा रक्खा था  !!

सोचता हूँ की अब कह दूं अलविदा उसको 
कभी उल्फत में जिसका नाम वफ़ा रक्खा था  !!

~~rishu~~