मंगलवार, 3 नवंबर 2009

महाभारत.............


कर रहा विलाप पाप,
बढ़ रहे हैं धर्मराज ,
विदुर खड़ा सूना रहा है,
कौरवों का सर्वनाश !!
..
.
सूर्य छुप गया कहीं ,
और धरा भी हिल रही ,
ये कैसा वक़्त आ गया की ,
दिन है न निशा रही !!
..
.
ये युद्ध एक प्रमाण है ,
मनुष्यता की जीत का ,
इसी में दिख रहा है फर्क ,
द्वेष और प्रीत का !!
..
.
अभी ख़तम नहीं हुआ,
ये युद्ध अब भी जारी है,
अभी भी पांडु-पुत्र हैं,
अभी भी वंशी धारी हैं !!

अभी भी वीर कर्ण के ,
ज्ञान चक्षु बंद हैं .
अभी भी द्रोणाचार्य के ,
अंतर ह्रदय में द्वंद है
..
.
है जरुरत आज फिर ,
कृष्ण के उपदेश की ,
आज फिर अर्जुन का साहस
अंतर्व्यथा में मंद है


परन्तु मित्र देखना ये युद्ध हारना नहीं ,
असत्य के समक्ष अपने अस्त्र डालना नहीं ;
तुम्हे शपथ है सत्य की,
स्वयं तुम्हारे रक्त की;
तुम्ही में आज भीम है तुम्ही में आज पार्थ है ;
तुम्हारे हाथ में ही आज द्रोपदी की लाज;
...

तुम आज भी समर्थ हो पुनः विजय तुम्हारी है !!


~~rishu~~

8 टिप्‍पणियां:

  1. THAKUR SAAHAB LAAJAWAB KAVITA.. UMDA TARIKE SE SHABDO KA ISTEMAAL, AUR ISTEMAAL AISA KE PADHNE WAALE KO AGLI LINE PADHNE PAR MAJBOOR HONA PADE.. BAHUT ACHCHA LIKHTE RAHIYE...

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  2. THAKUR SAAHAB LAAJAWAB KAVITA.. UMDA TARIKE SE SHABDO KA ISTEMAAL, AUR ISTEMAAL AISA KE PADHNE WAALE KO AGLI LINE PADHNE PAR MAJBOOR HONA PADE.. BAHUT ACHCHA LIKHTE RAHIYE...

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  3. वाह वाह क्या बात है! बहुत ही सुंदर, शानदार और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने! इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई!

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  4. adhbhut varnan kiya he mahabharat ka......bahut khub rahcccchna huyi he rishu ji ... badhayi sweekarein....

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  5. Waah..achha laga aapki lekhni ka naya roop dekh kar....aapne to mahabharat kaal me pahucha diya or ek jhatke me wapas bhi aa diya.

    badhai.

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  6. Waah!! aapki rachnayein padh kar lagta hai jaise kisi bade kavi ko padh rahi hoo...kahi ye rishu aapka false name to nahi.

    kamaal likhte hai aap.
    shubh kamnayein!!

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