शनिवार, 28 नवंबर 2009

उनके लिए............

की कोशिश तुझे भुलाने की
और कसम थी पास न आने की

कुछ सपने दिल में दबे हुए
और ख्वाहिश तुझे मानाने की

जज्बात पड़े थे परदे में
जिन पर थी नज़र ज़माने की

जब कल तू मेरे साथ न थी
अब आज मुझे तेरी आस नहीं

कल सबने पूछा कौन हो तुम
मै कह बैठा कुछ याद नहीं....

~~rishu~~

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