गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

Ek Sher....

इस सफ़र-ए -हयात में कुछ हमसफ़र ऐसे भी हैं ,
जो इत्तेफाकन साथ हैं पर अजनबी हैं अब तलक !!


~~rishu~~

जिंदगी..............




कुछ इस तरह से जिंदगी अब कट रही है दोस्तों
प्यार में, परिवार में, दोस्ती-व्यवहार में 

बँट रही है दोस्तों
अब तलक तो चल रही थी सीधे रस्ते पर मगर
आज कल लगता है थोडा 

हट रही है दोस्तों
कल तलक जो पूज्य थे आदर्श इज्ज़तदार थे
आज कल उनकी भी इज्ज़त 

घट रही है दोस्तों
दोस्त थे वो कल भी..दोस्त हैं अब भी मगर
अपनी तो उनसे भी कन्नी 

कट रही है दोस्तों !!!!

~~rishu~~

गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

Ek Sher..

मुझे अब तक नहीं मालुम मेरी मंजिल कहाँ पर है,
मैं तो अब तलक गर्दिश का एक टूटा सितारा हूँ !!

~~rishu~~

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

Reply--- कोई दीवाना कहता है................

दोस्तों...आप सभी कुमार विश्वास जी से परिचित हैं और उनकी प्रसिद्ध रचना "कोई दीवाना कहता है... " से भी, जिसमे नायक अपनी नायिका को अपनी विवशता समझाने का प्रयास कर रहा है....एक छोटी सी कोशिश उस नायिका की तरफ से कर रहा हूँ..आशा है आप सब को पसंद आएगी---
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न मै दीवाना कहती हूँ न तो पागल समझती हूँ
तेरी यादो को इन पैरों की अब पायल समझती हूँ
हमारे दिल की दूरी घट नहीं सकती कभी क्यूंकि
न तुम मुझको समझते हो न मै तुमको समझती हूँ

मोहब्बत एक धोका है मोहब्बत एक फ़साना है
मोहब्बत सिर्फ ज़ज्बातों का झूठा कारखाना है
बहुत रोई हैं ये आँखें मोहब्बत की कहानी पर
तभी तो जानती हैं कौन अपना और बेगाना है

समय की मार ने आँखों के सब मंजर बदल डाले
ग़म-ऐ-जज़्बात ने यादो के सारे घर बदल डाले
मै अपने सात जन्मो में अभी तक ये नहीं समझी
न जाने क्यूँ भला तुमने भी अपने स्वर बदल डाले

ये सच है की मेरी उल्फत जुदाई सह नहीं पायी
मगर महफ़िल में सबके सामने कुछ कह नहीं पाई
मेरी आँखों के साहिल में समुन्दर इस कदर डूबा
बहुत ऊंची उठीं लहरें पर बाहर बह नहीं पाई

एक ऐसी पीर है दिल में जो जाहिर कर नहीं सकती
कोई बूटी मेरे दिल के जखम अब भर नहीं सकती
मेरी हालत तो उस माँ की प्रसव-पीड़ा से बदतर है
जो पीड़ा से तो व्याकुल है मगर कुछ कर नहीं सकती

बहोत अरमान आँखों में कभी हमने सजाये थे
तेरी यादो के बन्दनवार इस दर पर लगाये थे
तुम्हारा नाम ले लेकर वो अब भी हम पे हस्ते है
तुम्हारे वास्ते जो गीत हमने गुनगुनाये थे !!

तुम्हारे साथ हूँ फिर भी अकेली हूँ ये लगता है
मै अब वीरान रातों की सहेली हूँ ये लगता है
न जाने मेरे जज्बातों की पीड़ा कौन समझेगा
मैं जग में एक अनसुलझी पहेली हूँ ये लगता है

ये दिल रोया पर आंसू आँख से बाहर नहीं निकले
हमारे दिल से तेरी याद के नश्तर नहीं निकले
तुम्हारी चाहतो ने इस कदर बदनाम कर डाला
किसी के हो सके हम इतने खुशकिस्मत नहीं निकले

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आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा !!
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~~rishu~~

Ek Sher..

हम तो सोचे थे करेंगे उनसी कुछ कारीगरी ,
हम भी उनसे हो गए और गलतियाँ करने लगे !!.

~~rishu~~

बुधवार, 2 दिसंबर 2009

For sale......



अज़ब हाल देखो नयी रौशनी का
दुनिया में क्या-क्या व्यसन बिक रहे हैं
तन बिक चुका है ,मन बिक चुका है
सदन बिक चुका अब वतन बिक रहे हैं ....

किरण बिक चुकी है हिर
बिक चुके हैं
करम बिक चुके अब धरम बिक रहे हैं
बुजुर्गो की शान और ईमान खो ....
चंद नोटों की खातिर अपन बिक रहे हैं

अनोखा तमाशा यहाँ का भी 'Rishu'
सरे आम दूल्हा -दुल्हन बिक रहे हैं
जरा जा के उन माँओं बहनों से पूछो
गोदी के जिनके ललन बिक रहे हैं

ज़माने के मालिक जरा होश में आ
लंगोटी से ज्यादा कफ़न बिक रहे हैं
हाल ये है की झूटी प्रशंसा की खातिर

कवी और कवी के कलम बिक रहे हैं !!

~~rishu~~