शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

Reply--- कोई दीवाना कहता है................

दोस्तों...आप सभी कुमार विश्वास जी से परिचित हैं और उनकी प्रसिद्ध रचना "कोई दीवाना कहता है... " से भी, जिसमे नायक अपनी नायिका को अपनी विवशता समझाने का प्रयास कर रहा है....एक छोटी सी कोशिश उस नायिका की तरफ से कर रहा हूँ..आशा है आप सब को पसंद आएगी---
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न मै दीवाना कहती हूँ न तो पागल समझती हूँ
तेरी यादो को इन पैरों की अब पायल समझती हूँ
हमारे दिल की दूरी घट नहीं सकती कभी क्यूंकि
न तुम मुझको समझते हो न मै तुमको समझती हूँ

मोहब्बत एक धोका है मोहब्बत एक फ़साना है
मोहब्बत सिर्फ ज़ज्बातों का झूठा कारखाना है
बहुत रोई हैं ये आँखें मोहब्बत की कहानी पर
तभी तो जानती हैं कौन अपना और बेगाना है

समय की मार ने आँखों के सब मंजर बदल डाले
ग़म-ऐ-जज़्बात ने यादो के सारे घर बदल डाले
मै अपने सात जन्मो में अभी तक ये नहीं समझी
न जाने क्यूँ भला तुमने भी अपने स्वर बदल डाले

ये सच है की मेरी उल्फत जुदाई सह नहीं पायी
मगर महफ़िल में सबके सामने कुछ कह नहीं पाई
मेरी आँखों के साहिल में समुन्दर इस कदर डूबा
बहुत ऊंची उठीं लहरें पर बाहर बह नहीं पाई

एक ऐसी पीर है दिल में जो जाहिर कर नहीं सकती
कोई बूटी मेरे दिल के जखम अब भर नहीं सकती
मेरी हालत तो उस माँ की प्रसव-पीड़ा से बदतर है
जो पीड़ा से तो व्याकुल है मगर कुछ कर नहीं सकती

बहोत अरमान आँखों में कभी हमने सजाये थे
तेरी यादो के बन्दनवार इस दर पर लगाये थे
तुम्हारा नाम ले लेकर वो अब भी हम पे हस्ते है
तुम्हारे वास्ते जो गीत हमने गुनगुनाये थे !!

तुम्हारे साथ हूँ फिर भी अकेली हूँ ये लगता है
मै अब वीरान रातों की सहेली हूँ ये लगता है
न जाने मेरे जज्बातों की पीड़ा कौन समझेगा
मैं जग में एक अनसुलझी पहेली हूँ ये लगता है

ये दिल रोया पर आंसू आँख से बाहर नहीं निकले
हमारे दिल से तेरी याद के नश्तर नहीं निकले
तुम्हारी चाहतो ने इस कदर बदनाम कर डाला
किसी के हो सके हम इतने खुशकिस्मत नहीं निकले

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आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा !!
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~~rishu~~

8 टिप्‍पणियां:

  1. मैने कुमार विश्वास का नाम पढ़ कर के आपके ब्लॉग पर आया था और मुझे विश्वास ही नही होता की मैने इतनी बेहतरीन रचना पाई....बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...हर पंक्ति लाज़वाब..बधाई बहुत बहुत बधाई...मुझे तो बहुत ही अच्छा लगा..

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  2. मुझे लगता है आपने उम्दा जवाब दिया है..और सुन्दर लिखा है...!!!

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  3. उन गुनगुनाये गीतों को याद कर आँखें रोयेई कई बार ...बहुत खूब बयां किया नायिका की भावना को ...!!

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  4. ाअद्भुत् । शायद इस से बेहतर जवाब नहीं हो सकता बधाई

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  5. rishu ji aapki rachna ko dr. sahab ki tippani mili, mujhe aasha thi is baat ki, aapne apni rachna ke naayika ki jo vivashta vayakt ki wo atiuttam jawab hai.........koi deewana "ke nayak
    ke liye.............

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  6. bahut badiya.... bahut accha jawab hai.....Vishwas sir ko bhejiye ise

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  7. bahut achha hai. kumar ki chhabi se milti hai apki rachnaye, koi deewana kahta ha ka satik jabab hai, nayika ka.
    favolous.....

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  8. so nice
    rishu ji kafi achchha likhte hai aap i have no words 4 this poem realy nice true...sir ji

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