शनिवार, 18 दिसंबर 2010

Pagli Ladki...........


दोस्तों आज काफी समय के बाद कुछ लिखा...डॉ. साहब की रचना "कोई दीवाना कहता है " के reply को आप सभी ने सराहा...आज फिर से उन्ही की एक प्रसिद्द रचना "पगली लड़की " को आगे बढाने की एक छोटी सी कोशिश है आशा है आप सभी का आशीर्वाद मिलेगा......

अमावास की काली रातों में दिल कुछ भर सा जाता है
जाने हर रात कलेजे में एक दर्द ठहर सा जाता है
आवाजें सब चुप रहती हैं, सन्नाटे चिल्लाते हैं
रोशनदानो के रस्ते अन्दर, स्याह अँधेरे आते हैं
तन्हाई का हर लम्हा, सदियों सा लम्बा लगता है
जिन्दा हूँ पर जीने का, एहसास अचम्भा लगता है
ऐसे में फिर यादों में वो, पगली लड़की आ जाती है
और उस पगली लड़की के बिन फिर वीरानी छा जाती है !!

अब तो जाने क्या होता है हर आहट से डरते हैं
खिड़की ,दरवाजे, छत, बिस्तर  उपहास हमारा करते हैं
लिखने बैठू तो कविता के सब शब्द ख़तम हो जाते हैं
कलम चलाने से पहले ही कागज़ नम हो जाते हैं
घर का कोई काम नहीं जचता, न कारोबार सुहाता है
बस समय काटने को पड़ोस का लल्ला पढने आता है
अब ऐसे ही दिन उगता है ,और ऐसे ही दिन कट जाता है
अब घर की चार दीवारों में संसार ख़तम हो जाता है
जब शाम कभी तन्हाई में ये आँखे नम हो जाती है
ऐसे में फिर यादों में वो, पगली लड़की आ जाती है
और उस पगली लड़की के बिन फिर वीरानी छा जाती है !!

अब तो अपनी हर रचना की शुरुआत उसी से करता हूँ  
शब्दों ,छंदों के चित्रों में सब रंग उसी के भरता हूँ
अब तो बाबा, भाभी ,दीदी सब बोलन से घबराते हैं
अब तो हमसे बिन पूछे ही रिश्ते  ठुकराए जाते हैं
अब तो हम घर की चौखट के बहार से भी कतराते  हैं
अब तो भैया भी शहर छोड़कर गाँव मनाने आते हैं
जब दिल में जीवन जीने की इक्षाएं ख़तम हो जाती है
ऐसे में फिर यादों में वो पगली लड़की आ जाती है
और उस पगली लड़की के बिन फिर वीरानी छा जाती है !!

हलाकि अब उसका मेरा साथ असंभव लगता है
लेकिन उसके न होने का एहसास भी दिल को लगता है
वो पगली लड़की अब भी मेरी ग़ज़लो में बसती है
उसकी सूरत उसकी सीरत अब भी इस दिल में बसती है
अब भी उसकी बांधी हुई ताबीज गले में लटकी है
अब भी उसकी साँसों से मेरी साँसे अटकी है
अब भी जाने क्यों खुद अपना ,हर शब्द अनाड़ी लगता है
अब भी पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता है !!

~~rishu~~

गुरुवार, 4 नवंबर 2010

शुभ दीपावली......

रात आई और दीयों की रौशनी दिखने लगी, मसरूफियत के बीच हमको भी ख़ुशी दिखने लगी!
जश्न-ऐ-दिवाली है सजे हैं घर अमीरों के,गुमशुदा गलियों में फैली मुफलिसी दिखने लगी !!

~~rishu~~

Ek Sher.........

कभी रोता हूँ तो खिलखिला के हंसती है,जिंदगी अब भी मेरी ख्वाहिशो से जलती है!
अकेला देखकर मुझको ये भूल जाती है,मेरे संग में मेरी माँ की दुआ भी चलती  है !!

~~rishu~~

शनिवार, 7 अगस्त 2010

चला गया...............


कल फिर कोई दिल को दुखाकर चला गया,
आँखों को फिर एक बार रुला कर चला गया !!

हम सोचते थे वो न मिलेगा तो क्या होगा ,
इस बात का एहसास दिलाकर चला गया !!

वो है मेरा इसका मेरे दिल को गुरूर था ,
इसको भी वो औकात दिखा कर चला गया !!

एक उम्र हुई हम वो सड़क भूल चुके हैं
वो जिस सड़क पे धूल उड़ा कर चला गया !!

आँखों को फिर एक बार रुला कर चला गया !!
~~rishu~~

रविवार, 28 मार्च 2010

Ek Muktak......

हम तो दिन और रातो में बस नगमे गाते रहते हैं
हर महफ़िल हर बज़्म में यु ही आते जाते रहते हैं
मालूम है कुछ लोग हमारी फितरत से नावाकिफ हैं
फिर भी अपनी आदत है हम हाथ बढ़ाते रहते हैं .
~~rishu~~

शनिवार, 27 मार्च 2010

अंतर्मन...................


आज मेरे सामने खुशियों से ज्यादा ग़म हैं,
फिर भी लगता है इन आँखों में नमी कुछ कम हैं,
 
भूल जाना चाहता हूँ... कौन हूँ और क्या हूँ मैं,
लहलहाता खेत या तपता हुआ सहरा हूँ मैं,
मैं ज़मी की धूल हूँ या हूँ पर्वत का शिखर,
चौदवीं का चाँद हूँ या टूटता तारा हूँ मैं,
 
ढूँढने निकला जो खुद को खुद जहाँ में खो गया,
सुख से कोसों दूर दुःख के आँचलों में सो गया,
मैं मेरी पहचान भी अब भूलता सा जा रहा हूँ,
पर दिल में रोता जा रहा हूँ....
जाने क्यों रोता जा रहा हूँ????

~~rishu~~

रविवार, 7 फ़रवरी 2010

Ek Muktak......

तुम्हारे स्वप्न क्या टूटे सरे बाज़ार हंगामा
मैंने जब भी कुछ चाहा हुआ हर बार हंगामा
मेरे मौला ये कैसी कशमकश तूने अता कर दी
गिरें आंसू तो हंगामा जो मुस्काऊं तो हंगामा !! 
~~rishu~~

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

For child youth of india..on Republic Day......

फिर से एक गणतंत्र दिवस,
फिर से वो तिरंगा फहराना,
और उसी तिरंगे के आगे......फिर से जन गण मन गाना
क्या इतना करना काफी है ???

क्या भूल गए अपना भारत,
जो अब भी भूका नंगा है
और तिरंगा जात पात के ....बदरंगो से रंगा है,

आखिर कब तक, कब तक आखिर
ये जंग हमें लड़नी होगी,
अपनी ही किस्मत की रेखा
अपने हाथो गढ़नी होगी....
गर हम सब हिन्दुस्तानी हैं ..... फिर इतना भेद भाव क्यूँ है ?
हर एक अमर के चेहरे पर......अकबर के लिए ये ताव क्यों है ?
ये हिन्दू है.....वो मुस्लिम है......वो गुरद्वारे में जाता है ;
इन बातो का क्या मतलब है,ये कौन हमें सिखलाता है ?

क्या मंदिर मस्जिद गुरद्वारा क्या गिरजाघर की बात करें,
ये बर्बादी की बाते हैं जो अपने पुरखे करते थे !

लेकिन तुम सब तो बच्चे हो ,
और बच्चे प्यार जानते हैं ;
उनको तकरार नहीं आती ,
वो तो सम्मान जानते हैं ;
उनको अल्लाह से क्या मतलब ,
उनको भगवान् से क्या लेना
वो तो इन सब का मतलब भी..........केवल खिलवाड़ जानते हैं!

इसलिए ऐ भारत के गौरव ,
मुझको बस इतना कहना है...
हम सारे हिन्दुस्तानी हैं ,
हम सब को मिलकर रहना है ,

और आगे बढ़ते रहना है...बस......आगे बढ़ते रहना है!

~~rishu~~

रविवार, 24 जनवरी 2010

Ek Muktak......



इस दीवानेपन में हमने धरती अम्बर छोड़ दिया,
उनकी पग रज की चाहत में घर आँगन छोड़ दिया,
कुछ कुछ जैसे मीरा ने त्यागा अपना धन वैभव,
कान्हा की खातिर ज्यूँ राधा ने वृन्दावन छोड़ दिया !!

~~rishu~~

शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

नए साल पर..........

तमन्ना है की भूल जाऊं वो गुजरा साल पूरा
वो धमाकों में गुजरी शाम और बवाल पूरा
वो दिन जो खौफ के पहरे में उगा करते थे
और रात सर्द सन्नाटे में बीत जाती थी
अमन के नाम पर होती थी रोज जंग नयी
इंसानियत भी हैवानों के गीत गाती थी
ये “नया साल ” वो सारे गम भुला सके न सके
अपनी खुशियों से दिल के दर्द मिटा सकता है
भले न दे ये मुझको मेरी मंजिल बेशक……..मगर मंजिल का रास्ता तो दिखा सकता है …..
मुझको उस राह का राही तो बना सकता है !!
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Wishing You All A Very Happy New Year.
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~~rishu~~