शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

नए साल पर..........

तमन्ना है की भूल जाऊं वो गुजरा साल पूरा
वो धमाकों में गुजरी शाम और बवाल पूरा
वो दिन जो खौफ के पहरे में उगा करते थे
और रात सर्द सन्नाटे में बीत जाती थी
अमन के नाम पर होती थी रोज जंग नयी
इंसानियत भी हैवानों के गीत गाती थी
ये “नया साल ” वो सारे गम भुला सके न सके
अपनी खुशियों से दिल के दर्द मिटा सकता है
भले न दे ये मुझको मेरी मंजिल बेशक……..मगर मंजिल का रास्ता तो दिखा सकता है …..
मुझको उस राह का राही तो बना सकता है !!
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Wishing You All A Very Happy New Year.
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~~rishu~~

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