गुरुवार, 4 नवंबर 2010

शुभ दीपावली......

रात आई और दीयों की रौशनी दिखने लगी, मसरूफियत के बीच हमको भी ख़ुशी दिखने लगी!
जश्न-ऐ-दिवाली है सजे हैं घर अमीरों के,गुमशुदा गलियों में फैली मुफलिसी दिखने लगी !!

~~rishu~~

Ek Sher.........

कभी रोता हूँ तो खिलखिला के हंसती है,जिंदगी अब भी मेरी ख्वाहिशो से जलती है!
अकेला देखकर मुझको ये भूल जाती है,मेरे संग में मेरी माँ की दुआ भी चलती  है !!

~~rishu~~