शनिवार, 25 जून 2011

Madhushalaa............

जो मधु के मद में डूबे हैं
वो मधुघट बड़े अजूबे हैं
ये मृदु पात्र मधु पीते हैं
छण भंगुर जीवन जीते हैं
ये मदिरा पीने वालो के
हाथों में टकराते हैं...गिर. टूट. छटक कर बिखर कही फिर यादो में खो जाते हैं
यूँ लगता है हम मधुघट हैं..और जीवन एक मधुशाला है
और वो जो ऊपर बैठा है.. वो मदिरा पीने वाला है !!

~~rishu~~